12 अक्टूबर 2016

मोदी जी के बारे में नॉस्त्रेदमस की भविष्यवाणियां

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महान भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस उन ज्योतिषियों में से एक माने जाते हैं जिनकी भविष्यवाणियों ने दुनिया को उनका लोहा मानने पर मजबूर किया। नास्त्रेदमस का जन्म फ्रांस में हुआ था और वो ना सिर्फ भविष्यवक्ता बल्कि एक डॉक्टर और शिक्षक भी थे। वो प्लेग जैसी जटिल बीमारियों का इलाज करते थे। उन्होंने अपनी कविताओ के माध्यम से भविष्य में होने वाली घटनाओं की भविष्यवाणी की जो सत्य हुई।फ्रांस में 14 दिसंबर, 1503 को जन्मे नास्त्रेदमस ने अपनी पुस्तक में 12 सेंचुरिज यानी बारह सौ चतुष्पदियां लिखी हैं। उनमें से अब मात्र 955 अस्तित्व में हैं। इनमें से लगभग 3 हजार भविष्य कथनों का वर्णन है। गत 44 वर्षों में उनकी 800 भविष्यवाणियां सत्य की कसौटी पर सही उतरी हैं।

सेंचुरीज में सन् 3797 तक के समयकाल की भविष्यवाणियां की गई हैं। फ्रांस के मेस बाबहम ने 4 मई 1555 को फ्रांसीसी भाषा में नास्त्रेदमस की पुस्तक का प्रकाशन किया था।  पुस्तक की प्रकाशन पूर्व इतनी ख्याति हो चुकी थी कि प्रकाशन दिनांक को लंबी कतारें उसके खरीददारों की लगी थीं और पुस्तक का प्रथम संस्करण एक ही दिन में समाप्त हो गया था।
राजाज्ञा से एक उत्तम वायु चालक अपना पेशा छोड़कर देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हो जाएगा। सात वर्षों तक ख्याति प्राप्त करने के पश्चात उसका ऐसा अंत होगा, जो रोंगटे खड़े कर देगा।’ संजय गांधी की मृत्यु के पश्चात राजीव गांधी अपनी माता इंदिराजी की सहायता करने हेतु राजनीति में आए। सन् 1984 में इंदिराजी की हत्या के पश्चात वे कांग्रेस के नेता बने, फिर प्रधानमंत्री। 7 वर्ष पश्चात सन् 1991 में दिल दहला देने वाली हत्या हुई थी।
निष्कासित स्त्री फिर सत्तारूढ़ होगी। उसके बैरी उसके विरुद्ध षड्यं‍त्र करेंगे। तीन वर्षों के अपने यादगार कार्यकाल के बाद सत्तर की आयु के लगभग उसकी मृत्यु होगी।’  सन् 1977 के आम चुनाव में इंदिराजी की पराजय हुई थी और जनता पार्टी की सरकार बनी थी। किंतु 1980 में वे वापस सत्ता में आईं और प्रधानमंत्री बनीं। जब उनकी हत्या कर दी गई, उस समय उनकी आयु 67 वर्ष की थी

नास्त्रेदमस ने नरेंद्र मोदी के बारे में भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि भारत में एक शक्तिशाली व्यक्ति का युग आयेगा और देश महाशक्ति बनकर उभरेगा यही नहीं भारत का पूरा वजूद बदल जायेगा।

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला 9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले की भविष्वाणी नास्त्रेदमस ने बहुत पहले की थी। उन्होंने कहा था कि न्यूयॉर्क स्थित डब्ल्यूडीसी पर संकट के बादल आयेंगे जोकि सत्य साबित हुआ।

तीसरा विश्व युद्ध होगा आतंकवाद के खात्मे के लिए नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की है कि तीसरे विश्वयुद्ध के लिए जमीन 2015-16 तक तैयार होने लगेगी। विश्व की कट्टर ताकतों के खिलाफ जिसमें अमेरिका और रूस एक साथ आ जायेगे वो दुनिया से आतंकवाद को खत्म करने के लिए लड़ाई लड़ेगे।

अमेरिका सहित कई देशों के लिए बुरा समय नास्त्रेदमस के अनुसार 2015 का अंत अमेरिका के लिए काफी अहम होगा। इस साल अमेरिका को चीन, रूस और ईरान से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगाे. यही नहीं इस साल अमेरिका में भयावह तूफान आने की संभावना है जोकि अमेरिका के बड़े हिस्से को तबाह कर देगा।

यूरोप में आयेगा भारी आर्थिक संकट नास्त्रेदमस ने यूरोप में एक बड़े आर्थिक संकट की भी भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा था कि कई यूरोपीय देश आर्थिक मंदी की चपेट में आयेंगे।

हिटलर के बारे में भविष्यवाणी नास्त्रेदमस ने दूसरे विश्व युद्ध के भी संकेत बहुत पहले दे दिये थे। एडोल्फ हिटलर के बारे में लिखते हुए नास्त्रेदमस ने बीस्ट शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसका अर्थ जानवर होता है। इस शब्द को हिटलर से जोड़ा जाता है। दूसरे विश्वयुद्ध की भविष्यवाणी नास्त्रेदमस दूसरे विश्वयुद्ध की भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि एक बीस्ट की सनक के चलते दुनिया सबसे भयावह युद्ध का सामना करेगी। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध में हजारों निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारा जाएगा।


लंदन में लगी भीषण आग नास्त्रेदमस ने लंदन में भी आग लगने की भविष्यवाणी की थी। उनकी भविष्यवाणी सच हुई और 1966 में पुडिंग लेन स्थित थॉमस फैरिनर में लगी आग ने सिर्फ 3 दिन पूरे शहर को जलाकर राख कर दिया था।


सन् 1789 की राज्य क्रांति का संकेत करते हुए सेंचुरी 1, चतुष्दी 14 में बताया गया है- ‘आम व्यक्तियों द्वारा राजकुमारी एवं राजपरिवार के सदस्य बंदी बनाए जाएंगे किंतु बंदी बनाने वाले मूर्खों के शिरोच्छेद किए जाएंगे और उसके पश्चात विद्रोही राजपरिवार एवं अभिजात्य लोगों को एक-एक कर मारेंगे।’ ‘ अर्थव्यवथा बिगड़ेगी, जनता राजा का विरोध करेगी। शांति स्थापना के प्रयत्न होंगे। पवित्र कानूनों की समाप्ति होगी, पेरिस का यह संकटपूर्ण दौर अकल्पित होगा।’
एक फ्रांसीसी, जिसने साम्राज्य युद्ध करके जीता है, अपने बहनोई द्वारा धोखा खाएगा। ‘फ्रांस में ऐसा शासक होगा, जिसका नाम पूर्ववर्ती शासकों से अलग होगा। उसके मारे सभी थर्राएंगे। विदेशी महिला की ओर वह मोहित होगा।’ ‘महान साम्राज्य छिन्न-भिन्न होगा, फिर बढ़ेगा और फिर सिमटकर सीमित हो जाएगा। ’मारकाट का अकल्पित दौर पेरिस में चला था जिसका नाम लुईयों से अलग था, सत्ता में आया। वह राज्य क्रांति कराके युद्ध में जीता और अपना दबदबा कायम किया। सन् 1814 में नेपोलियन की राज्य सीमा बहुत कम हो गई थी, फिर उसने प्रयास करके उसे बढ़ाया। सौ दिनों तक ऐसी स्‍थिति बनी रही।
1997 में पेरिस में कार दुर्घटना में ब्रिटेन की राजकुमारी डायना की मौत हो गई। उस समय उनके साथ ब्वॉयफ्रेंड डोडी फयाद भी मौजूद थे। उसके पिता का नाम मोहम्मद था(the surname of Prophet). मर्सडीज बेन्ज डब्ल्यू140 का ड्राइवर हेनरी पॉल था। इस हादसेमें जिंदा बचा डोडी का बॉडीगार्ड ट्रेवर रीस जोंस का कहना था कि उनके पीछे मीडिया की गाड़ी थी। जिससे बचने के दौरान यह हादसा हो गया। इस घटना के लिए मीडिया पर पैपराजी पत्रकारिता का आरोप भी लगा था। 1999 में फ्रांसीसी न्यायिक जांच में खुलासा हुआ कि इस हादसे का जिम्मेदार हेनरी ड्राइवर था, जो कार पर से अपना नियंत्रण खो चुका था। उसने बहुत शराब पी रखी थी।
फ्रांस के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की सेन्चुरी ग्रंथ मे फ्रेंच भाषा मे लिखा हैं कि 2014 से लेकर 2026तक भारत का नेतृत्व एक ऐसा आदमी करेगा जिससे लोग शुरू में नफरत करेंगे मगर इसके बाद देश की जनता उससे इतना प्यार करेंगी कि वह 20 साल तक देश की दशा और दिशा बदलने में जुटा रहेगा जिसके पृष्ठ 32-33 पर स्पष्ट लिखा है ठहरो राम राज्य आ रहा हैं, एक अधेड़ उम्र का अजोड़ महासत्ता अधिकारी भारत ही नहीं सारी पृथ्वी पर स्वर्ण युग लायेगा। जो अपने सनातन धर्म का पुनउत्थान करके भारतको सर्व श्रेष्ठ हिन्दू राष्ट्र बनायेगा। चांडाल चौकड़ियों को परास्त कर अपने दम पर सत्ता पे काबिज होगा।उनके नेतृत्व में हिन्दूस्तान न सिर्फ विश्व गुरु बनेगा बल्कि कई देश भारत की शरण में आ जायेगे

वर्ष 2015 में एंटीक्रिस्ट का जन्म होगा जो ईसाईयों और मानवता का घोर विरोधी होगा और पूरी दुनिया को अपने कदमों में झुकाने के लिए तत्पर होगा। एंटीक्रिस्ट जल्दी ही एक या अनेक देशों पर कब्जा कर वहां की जमीन खून से लाल कर देगा। यदि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों पर काम करने वाले विशेषज्ञों की राय मानी जाए तो यह यह एंटीक्रिस्ट धार्मिक कट्टरपंथ के रूप में आईएसआईएस के रूप में जन्म ले चुका है। यह आतंकी संगठन किसी धर्म को नहीं मानता वरन स्वयं के खलीफा होने का दावा करता है। धर्म के नाम पर आईएस के सदस्यों ने अरब जगत में तबाही मचा दी है।


नास्त्रेदमस के अनुसार वर्ष 2015 वैज्ञानिकों को बड़ी बीमारियों के इलाज में सफलता मिलेगी। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष वैज्ञानिकों ने एक नया शक्तिशाली एंटीबॉयोटिक टिक्सोबेक्टिन ढूंढा है। इससे पहले आखिरी एंटीबॉयोटिक आज से 25 वर्ष पहले बनाया गया था।

माउंट विसुवियस पर स्थित ज्वालामुखी फटेगा और अपने आस-पास की सभी जगह को बरबाद कर देगा। यह घटना वर्ष 2015 के अंत में तथा वर्ष 2016 के शुरू में होने की संभावना है। माउंट विसुवियस एक बहुत ही खतरनाक ज्वालामुखी है। 79 ईस्वी में हुए एक भयानक विस्फोट में 16000 लोग मारे गए थे। यदि आज उतनी तीव्रता का इसमें विस्फोट हो तो मरने वालो की संख्या कई लाखों में होगी

11 अक्टूबर 2016

रावण का रहस्य, यहां रखा है शव

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श्रीलंका में वह स्थान ढूंढ लिया गया है, जहां रावण की सोने की लंका थी और जहां रावण के मरने के बाद उसका शव रखा गया है। श्रीलंका का इंटरनेशनल रामायण रिसर्च सेंटर और वहां के पर्यटन मंत्रालय ने मिलकर रामायण से जुड़े ऐसे 50 स्थल ढूंढ लिए हैं जिनका पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व है और जिनका रामायण में भी उल्लेख मिलता है। श्रीलंका सरकार ने ‘रामायण’ में आए लंका प्रकरण से जुड़े तमाम स्थलों पर शोध करवाकर उनकी ऐतिहासिकता सिद्ध कर इन स्थानों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना ली है। इसमें भारत भी मदद कर रहा है।

 ऐसा माना जाता है कि रैगला के जंगलों के बीच एक विशालकाय पहाड़ी पर रावण की गुफा है, जहां उसने घोर तपस्या की थी। उसी गुफा में आज भी रावण का शव सुरक्षित रखा हुआ है। रैगला के घने जंगलों और गुफाओं में कोई नहीं जाता है, क्योंकि यहां जंगली और खूंखार जानवरों का बसेरा है। रैगला के इलाके में रावण की यह गुफा 8 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। जहां 17 फुट लंबे ताबूत में रखा है रावण का शव। इस ताबूत के चारों तरफ लगा है एक खास लेप जिसके कारण यह ताबूत हजारों सालों से जस का तस रखा हुआ है। मिस्र में प्राचीनकाल में ममी बनाने की परंपरा थी, जहां आज भी पिरामिडों में हजारों साल से कई राजाओं के शव रखे हुए हैं। यह भी जानना जरूरी है कि उस समय शैव संप्रदाय में समाधि देने की रस्म थी। रावण शैवपंथी था।
झरना : ‘रावण एल्ला’ नाम से एक झरना है, जो एक अंडाकार चट्टान से लगभग 25 मीटर अर्थात 82 फुट की ऊंचाई से गिरता है। रावण एल्ला वॉटर फॉल घने जंगलों के बीच स्थित है। यहां सीता नाम से एक पुल भी है। इसी क्षेत्र में रावण की एक गुफा भी है जिसे रावण एल्ला गुफा के नाम से जाना जाता है। यह गुफा समुद्र की सतह से 1,370 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान श्रीलंका के बांद्रावेला से 11 किलोमीटर दूर है।

हवाई अड्डे : रावण के पुष्पक विमान के उतरने के स्थान और रामायणकाल के कुछ हवाई अड्डे भी ढूंढ लिए गए हैं। वेरांगटोक जो महियांगना से 10 किलोमीटर दूर है, में हैं ये हवाई अड्डे। यहीं पर रावण ने सीता का हरण कर पुष्पक विमान को उतारा था। महियांगना मध्य, श्रीलंका स्थित नुवारा एलिया का एक पर्वतीय क्षेत्र है। इसके बाद सीता माता को जहां ले जाया गया था उस स्थान का नाम गुरुलपोटा है। इसे अब ‘सीतोकोटुवा’ नाम से जाना जाता है। यह स्थान भी महियांगना के पास है।

 कितने पुराने ?

वेद विज्ञानं मंडल, पुणे के डा० वर्तक जी ने वालमिकी रामायण में वर्णित ग्रहों नक्षत्रों की स्थति तथा उन्ही ग्रहों नक्षत्रों की वर्तमान स्थति पर गहन शोध कर रामायण काल को लगभग 7323 ईसा पूर्व अर्थात आज से लगभग 9336 वर्ष पूर्व का बताया है । इस विषय पर उन्होंने एक पूरी पुस्तक भी लिख डाली है जिसमे उन्होंने लगभग सभी मुख्य घटनाओं की तिथि निर्धारित की है ।

10 अक्टूबर 2016

आसमान से टपका, खजूर पे अटका।

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आजकल के अत्याधुनिक युग मे हालाँकि स्कूल कॉलेज के विद्यार्थियों का मानसिक स्तर पहले के मुकाबले काफी अच्छा है परंतु जो संस्कार पहले के लोगों द्वारा अपने बच्चे को दिए जाते थे, उनमे बहूत गिरावट आयी है। दूसरा स्कूल कॉलेजों के शिक्षक भी कुछ अहम बातें विद्यार्थियों को नही बताते, जो विद्यार्थियों को  सिखाई जानी बहुत जरूरी हैं। इनमे से कुछ बातें है जो अपने क्षेत्र के सफलतम लोगों द्वारा कही गई है, जिनको विद्यार्थीयो को बताना जरूरी समझा गया है।

  1. जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है  इसलिए सुरु से ही इसकी आदत बना लो ।
  2. लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह नहीं करते, इसलिए पहले खुद को साबित करके दिखाओ ।
  3. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच अंकों वाली तनखा की मत सोचो, एक रात में कोई बड़ा  और मसहूर आदमी नही  बनता. इसके लिए अपार मेहनत करनी पड़ती है। 
  4. अभी आपको अपने शिक्षक सख्त और डरावने लगते होंगे,  क्योंकि अभी तक आपके जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा।
  5. तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी है,  तुम्हारी पराजय सिर्फ तुम्हारी है, किसी को दोष मत दो, गलती से सीखो और आगे बढ़ो।
  6. तुम्हारे माता पिता तुम्हारे जन्म से पहले इतने नीरस और ऊबाऊ नही थे जितना तुम्हें अभी लग रहा है।  तुम्हारे पालन पोषण करने में उन्होंने इतना कष्ट उठाया कि अब  उनका स्वभाव ही बदल गया है।
  7. सांत्वना पुरस्कार सिर्फ स्कूल में देखने को मिलता है,  कुछ स्कूलों में तो पास होने तक परीक्षा दी जा सकती है।  लेकिन बाहर की दुनिया के नियम अलग हैं वहाँ हारने वाले को मौका नहीं मिलता।
  8. जीवन के स्कूल में कक्षाएं और वर्ग नहीं होते , और वहां महीने भर की छुट्टी नहीं मिलती । आपको सिखाने के लिए कोई समय नहीं देता । यह सब आपको खुद करना होता है ।
  9. टेलीविज़न का जीवन सही नहीं होता और जीवन टेलीविज़न के सीरियल नहीं होते । सही जीवन में आराम नहीं होता । सिर्फ काम और सिर्फ काम होता है।  क्या आपने कभी ये विचार किया कि लग्जरी क्लास कार (Jaguar, Hummer, BMW, Audi, Ferrari) का किसी टेलीविज़न चैनल पर कभी कोई विज्ञापन क्यों नही दिखाया जाता ? कारण यह कि उन कार कंपनी वालों को ये पता है कि ऐसी कार लेने वाले व्यक्ति के पास टेलीविज़न के सामने बैठने का फालतू समय नहीं होता ।
  10. लगातार पढ़ाई करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले अपने मित्रों को कभी मत चिढ़ाओ। एक समय ऐसा आएगा कि तुम्हें उनके नीचे काम करना पड़ेगा ।

9 अक्टूबर 2016

महान लोगों के महान विचार

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जब मे इस संसार मे बुराई खोजने चला, तो मुझसे बुरा कोई न मिला। जब मैंने अपने मन मे झाँका तो पाया कि सारी बुराई की जड़ मेरा मन था। संत कवीर



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सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग उस चाकू की तरह है जिसमें सिर्फ ब्लेड है,यह प्रयोग करने वाले व्यक्ति के हाथ से खून निकाल देता है । रविंद्रनाथ टैगोर  




प्रसन्नता पहले से निर्मित कोई चीज नही है, ये आप ही के कर्मों से आती है। दलाई लामा 






सफलता पहले से की गयी तैयारी पर निर्भर है,बिन तैयारी असफलता भी निश्चित है। कनफूसियस




व्यक्ति अकेले ही पैदा होता है और अकेले ही मरता है। अपने अच्छे बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है। आत्मा की आवाज से किये कर्म हमेसा अच्छे होते है। चाणक्य 
    

उत्कृष्टता वो कला है जो प्रशिक्षण और आदत से आती है। हम इसलिए सही कार्य नही करते कि हमारे अंदर अच्छाई या उत्कृष्टता है, बल्कि वो हमारे अंदर इसलिए है क्योंकि हमने सही कार्य किया। जैसा हम सोचते है वैसे ही बन जाते है। अरस्तू  




असली सवाल यह है कि तुम भीतर क्या हो। अगर भीतर की आत्मा दूषित है तो तुम जो भी करोगे, वो गलत ही होगा। जिसका पश्चाताप आपको करना ही होगा। यदि तुम्हारे भीतर की आत्मा पवित्र और निष्कलंक है, तो आप जो भी करोगे, वह सही फलित होगा। ओशो




जिसे धीरज है, जो संघर्ष और मेहनत से नही घबराता, कामयाबी और सफलता उसकी दासी है । स्वामी दयानंद सरस्वती 

  

क्रोध को पाले रखना, गर्म कोयले को अपने हाथ मे पकड़े रहने जैसा है। इससे आओ स्वयं ही जलते है। भगवान गौतम बुद्ध 





8 अक्टूबर 2016

सहादत को आसमान से सलामी।

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तेजस भारत द्वारा विकसित किया एक हल्का व कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है।इसका विकास 'हल्का युद्धक विमान' या (एलसीए) नामक कार्यक्रम के अन्तर्गत हुआ है  विमान का आधिकारिक नाम तेजस 4 मई 2003 को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था। 

मोदी सरकार ने अटल जी के कार्यक्रम मे दो चाँद लगाते हुए भारतीय वायुसेना के लिए पूर्णरूपेण "मेक इन इंडिया" का मंत्र अपना लिया, जिसके विश्व स्तर मे सकारात्मक परिणाम भी आने लगे हैं। हल्के लड़ाकू विमान तेजस का अपने देश में उत्पादन करना सैन्य विमानन उद्योग में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने की पूर्ण सम्भावनाये हैं।  स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस की पहली स्क्वाड्रन दो लड़ाकू विमानों को बेंगलुरु में शामिल होने के साथ भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया 

पहली बार 84 वें वायु सेना दिवस के हिस्से के रूप में गाज़ियाबाद के हिंडन एयरबेस मे तेजस का प्रदर्शन खास लोकप्रिय रहा।  तेजस की वजह से अब युद्धक विमानों की कमी को  कम महसूस किया जा रहा है।वो भी तब जब देश पाकिस्तान और चीन की सीमाओं से दोहरा खतरा झेल रहा है। 

सोवियत रुस के मिग-21 विमानों की खेप आना मना होने के बाद मौजूदा स्थिति को देखते हुए वर्ष 2022 तक भारतीय वायुसेना के पास मात्र 25 स्कवाड्रन विमान ही बच जाएंगे। यदि फ्रांस निर्मित 36 राफेल विमान 2018 के अंत तक मिल जाते है तो भारतीय वायुसेना की ताक़त मे अभूतपूर्व इज़ाफ़ा हो जायेगा जो अभी अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है।

7 अक्टूबर 2016

चार महान विभूतियां जिनसे हार गया था रावण।

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लोगों को यही पता हैं कि रावण सिर्फ श्रीराम से ही हारा था, लेकिन ये सच नहीं है। रावण श्रीराम के अलावा शिवजी, राजा बलि, बालि और सहस्त्रबाहु से भी पराजित हो चुका था। यहां जानिए इन चारों से रावण कब और कैसे हारा ?

1. एक बार रावण बाली से युद्ध करने के लिए पहुंच गया था। बाली उस समय पूजा कर रहा था। रावण बार-बार बाली को ललकार रहा था, जिससे उसकी पूजा में व्यवधान उत्पन्न हो रहां था। वह रावण को बीच मे थोडा रुक जाने का इसारा भी कर रहे थे। जब रावण नहीं माना तो बाली ने उसे अपनी बाजू में दबा कर चार समुद्रों की परिक्रमा  करवाई। बालि बहुत शक्तिशाली था और इतनी तेज गति से चलता था कि रोज सुबह-सुबह ही चारों समुद्रों की परिक्रमा कर लेता था। इस प्रकार परिक्रमा करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करता था। जब तक बालि ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित नही किया, तब तक रावण को अपने बाजू में दबाकर ही रखा । रावण ने बहुत प्रयास किया, लेकिन वह बालि की गिरफ्त से आजाद नहीं हो पाया। पूजा के बाद बालि ने रावण को छोड़ दिया। 

2. सहस्त्रबाहु अर्जुन के एक हजार हाथ थे और इसी वजह से उसका नाम सहस्त्रबाहु पड़ा था। जब रावण सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंचा तो सहस्त्रबाहु ने अपने हजार हाथों से नर्मदा नदी के बहाव को रोक दिया।  सहस्त्रबाहु ने नर्मदा का पानी इकट्ठा किया और पानी छोड़ दिया, जिससे रावण पूरी सेना के साथ ही नर्मदा में बह गया। इस पराजय के बाद एक बार फिर रावण सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंच गया। इस बार सहस्त्रबाहु ने उसे बंदी बनाकर जेल में डाल दिया ।

3. राजा बलि पाताल लोक के राजा थे। एक बार रावण राजा बलि से युद्ध करने के लिए पाताल लोक में उनके महल तक पहुंच गया । उसका मक़सद संसार मे सर्वश्रेस्ठ और शक्तिसाली बनना था। वहां पहुंचकर रावण ने बलि को युद्ध के लिए ललकारा।सास्त्रों मे उल्लेख मिलता है कि  उस समय बलि के महल में खेल रहे बच्चों ने ही रावण को पकड़कर घोड़ों के साथ अस्तबल में बांध दिया था। इस प्रकार राजा बलि के महल में रावण की हार हुई।

4. रावण बहुत शक्तिशाली था और उसे अपनी शक्ति पर बहुत ही घमंड भी था। रावण इस घमंड के नशे में शिवजी को हराने के लिए कैलाश पर्वत पर पहुंच गया था। रावण ने शिवजी को युद्ध के लिए ललकारा, लेकिन महादेव तो ध्यान में लीन थे। रावण कैलाश पर्वत को उठाने लगा। तब शिवजी ने पैर के अंगूठे से ही कैलाश का भार बढ़ा दिया, इस भार को रावण उठा नहीं सका और उसका हाथ पर्वत के नीचे दब गया। बहुत प्रयत्न के बाद भी रावण अपना हाथ वहां से नहीं निकाल सका। तब रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए उसी समय शिव तांडव स्रोत रच दिया। शिवजी इस स्रोत से बहुत प्रसन्न हो गए और उसने रावण को मुक्त कर दिया।  मुक्त होने के पश्चात रावण ने शिवजी को अपना गुरु बना लिया।

6 अक्टूबर 2016

एक नजर भारत के अंदर।

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बांग्लादेशी मूल की प्रसिद्द तस्लीमा नसरीन द्वारा भारत पर टिप्पणी की है कि भारत की स्तिथि आज सच मे भयानक हो चुकी है।उनका कहना है कि वे भारत मे बहुत से लोगों को बहुत अच्छी तरह से जानती है क्योंकि मैंने उनके साथ समय बिताया है और उनकी भावनाओं को जाना और समझा भी है।

उन्होंने कहा कि भारत की सेक्युलर पार्टियां और ज़िहादी तत्व पहले उनके सम्पर्क मे रहे है। वे ऐसे लोगों से अच्छी तरह वाक़िभ हैं।उन्होंने कहा कि आप मेरी बात का यकीन मानिए, भारत के जितने दुश्मन पाकिस्तान के अंदर नहीँ हैं, उस से ज्यादा दुश्मन भारत के अंदर ही मौजूद हैं और युद्ध के हालात मे ये लोग भारत का साथ देंगे, ऐसा सोचना भी बेइमानी है। 

आपको बता दें कि तस्लीमा नसरीन का साफ़ इसारा भारत के सेक्युलर, बामपंथी और ज़िहादी तत्वों की तरफ है। लेकिन वर्तमान मे भारत के केंद्र की सरकार गैर सेक्युलर हाथों मे होने के कारण इसकी सम्भावना कम ही नजर आ रही है।

5 अक्टूबर 2016

क्या आजादी के मायने बदल गये

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जब हम भारतवर्ष की बात करते हैं, तो आजादी शब्द जहन मे आ ही जाता है। हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की और मुगलों के शिकंजे से आजाद हुआ। अंग्रेजों द्वारा कितने ही अत्याचार हमारी पीढ़ियों के लोगों ने सहे हैं,  जिनकों हमने केवल किस्से कहानियों में देखा और सुना है। उनके हौंसले और आजादी के किस्से कहानियाँ हमारे अंदर आज भी एक जोश पैदा करते हैं। उनका त्याग और बलिदान हमारे लिये प्रेरणा का स्रोत हैं। देश को आजाद हुए आज आधी शताब्दी से भी अधिक समय हो गया है , और देश कहाँ से कहाँ पहुँच गया है। आधुनिक से अत्याधुनिकता के इस दौर में ऐसा लगता है मानों बहुत सारी बातें शायद पीछे रह गयी है। आधुनिक मानव की जो विचारधारा में परिवर्तन हुआ है, वह वास्तव में हमारे लिए सोचने की बात है। आज लोगों की सोच में आजादी के मायने ही शायद बदल गये है। जो जहाँ पद पर बैठा हैं वह अपने को बडा ताकतवर समझने लगा है। नियम कानून बदलनें में देर नहीं लगाता है और अपने हित के लिए तथा पैसा कमाने के लिए कुछ भी करने कराने के लिए तैयार रहता है।
                                 


आजादी शब्द सुनते ही मानव मस्तिष्क में एक ताजगी सी भर जाती है। आजादी शब्द ही अपने आप में एक  व्यापक और शक्ति भरा हुआ शब्द है। आजादी सभी को प्यारी है चाहे मानव हो या कोई जीव-जन्तु अर्थात् पशु-पक्षी। आजादी स्वयं कुछ  करने की और बिना किसी रोकटोक के जीवन जीने का नाम है।एक कहानी है कि एक राजा ने बोलते तोते को  सोने के पिंजरे में बंद कर दिया और उसे खानें में अच्छे-अच्छे व्यंजन दिए। लेकिन कुछ दिन बाद तोता मर गया। मंत्री ने राजा को तोते की  मृत्यु का कारण उसकी आजादी छीन लेना बताया। राजा को अपने किए पर पछतावा हुआ। उस घटना के बाद राजा का हृदय परिवर्तन हुआ  और वह रोजाना सुबह-सुबह जंगल में जाता तथा पक्षियों को दाना-पानी देता, उनको चहचाहते हुए सुनता, पहले पक्षी उससे दूर रहते थे।  लेकिन धीरे-धीरे पक्षी राजा के समीप बैठने लगे और कुछ दिन बाद तो पक्षी कभी राजा के सिर पर बैठ जाते तो कभी उनके कंधे और  भुजाओं पर। राजा को अब लगने लगा कि यह है आत्मिक सुख और किसी के साथ रहकर उनके विचारों को जानने तथा समझने का सही  तरीका। वास्तव में आजादी स्वयं में जीने की कला है।
                                  

हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने आजाद देश में देश के विकास की सोची थी। लेकिन वर्तमान तक आते-आते ये लोग अति महत्वकांशी हो गए । देश हित बाद में पहले अपना हित होना चाहिए। एक तरफ तो देश को आजाद कराने वाले वो लोग थे, जो दिन-रात सोते नहीं थे, खाना तक ठीक से खाते नहीं थे, घर-परिवार से कितने ही दूर, हर समय अपने ठिकाने बदलते रहते थे, कब पकडे जाये और जेल हो जाये या गोली लग जाये कुछ पता नहीं था। लेकिन एक लगन थी देश आजाद होना चाहिए।
                            


आज परिस्थितियाँ इसके विपरित दिखाई देती है। हम अपने ही राजनेताओं की हाथ की कठपुतलियाँ बन चुके हैं। धर्म, जाति, लिंग, वर्ग, भाषा, स्थान आदि के नाम पर लड रहे हैं। देश के विकास का पैसा जो संसद से पास होता है। जाकर विदेशी बैंकों में जमा हो जाता है। भूखी मरती जनता और असुविधाओं से भरा देश अपंग सा खडा दिखाई देता है। रोज नए राजनैतिक दल बन रहे हैं। करोडों अरबों के घोटाले राजनेताओं के लिए एक साधारण सी बात लगने लगी है। विकास के नाम पर केवल लोगों को ठगा जा रहा है। हम अपने ही लोगों के साथ अत्याचार और उनके हिस्से का खा रहे हैं। समाज में उथल-पूथल मची हुई है। हत्या, बलात्कार, चोरी, लूट आदि की घटानयें साधारण सी लगने लगी है। समाचारपत्र और टेलीविजन खून से लथपथ दिखाई देते हैं। कहीं सूखा तो कहीं बाढ से लोग मर रहे हैं। कहीं विद्यालय नहीं है तो कहीं उनमें सुविधाओं की कमियाँ है, शिक्षक नही है। कहीं चिकित्साल्यों की कमी, चिकित्सालय है तो डॉक्टर और दवायें नही,  कहीं नदियों के किनारे  सुरक्षा दीवारें नहीं है, बरसातों मे गांव के गांव भ जा रहे हैं। कहीं उन पर पुल नहीं बने हुए हैं। केवल देश चल रहा है। आजादी के इतने वर्षो बाद भी समझें में नहीं आता कि देश में सत्ता परिवर्तन और व्यवस्था परिवर्तन को लेकर आंदोलन क्यों हो रहे हैं। क्या लोगों में देशभक्ति या देशसेवा का भाव मिट चुका है। क्या सभी अपने लिए ही जीने की सोच रहे हैं। यदि यही सभी कुछ होना था तो फिर शहादत देने की क्या जरुरत थी। कम से कम हम ये तो कह देते हम अभी आजाद नहीं है। आने वाले स्वतंत्रता दिवस के दिन हमें यह कसम लेनी होगी कि हम वो हर काम जिससे अपने देश की तरक्की होती हो, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से  देश हित  मे  करेगैं।

4 अक्टूबर 2016

सच्ची दोस्ती

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रूस किसी भी हाल में भारत को नाराज नहीं करना चाहता।इस के चलते उसने पाकिस्तान के साथ न सिर्फ ज्वाइंट ड्रिल कैंसल कर दी है बल्कि रूस ने तीन MI-35 हेलिकॉप्टर बेचने की डील भी रद्द कर दी। दोनों देशों के बीच होने वाली यह ड्रिल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में होनी थी। 

 पाकिस्तान बनने के 69 साल में ऐसा पहली बार होने वाला था। एक नजरिया यह भी है कि पाकिस्तान यह ड्रिल करवाकर भारत को यह साबित करना चाह रहा था कि अब वह भारत के खास दोस्त रूस का भी दोस्त है। पर अफ़सोस वह अब ऐसा कुछ नहीं कर पायेगा। इस ज्वाइंट एक्सरसाइज को फ्रेंडशिप 2016 नाम दिया था।

3 अक्टूबर 2016

उत्तम खेती मद्ययम बान, निखिद्ध् चाकरी, भीख निदान।

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एक बहुत बडी कंपनी के गेट के सामने प्रसिद चाय, समोसे की दुकान थी। मध्यांतर के लंच समय मे कंपनी  के कर्मचारी वहां आकर चाय, समोसे खाया करते थे। एक दिन कंपनी के मेनेजर समोसे खाते-खाते समोसे वाले से मजाक के मूड मे आ गए। मैनेजर साहब ने समोसे वाले से कहा, यार जोशी जी, तुमने अपनी दुकान तुमने बहुत अच्छी तरह से चला रखी है।  यह बहुत ही अच्छी बात हैं । लेकिन क्या तुम्हे नही लगता कि तुम अपना समय और टैलेंट चाय, समोसे बेचकर बर्बाद कर रहे हो ? सोचो अगर तुम मेरी तरह इस कंपनी मे काम कर रहे होते तो आज कहाँ होते ? हो सकता है शायद तुम भी आज मेरी तरह मैनेजर होते ।” इस बात पर समोसे वाले जोशी जी सोच मे पढ़ गए और बोले, सर ये मेरा काम आपके काम से कही बेहतर है । लगभग 10 साल पहले जब मैं टोकरी मे समोसे बेचता था, मुझे अच्छे से याद है तभी आपकी जॉब लगी थी। तब मै हजार रुपये महीना कमाता था ,और आपकी पगार 10 हजार महिना थी।  इन 10 सालो मे हम दोनो ने खूब मेहनत की। आप सुपरवाइजर से मैनेजर बन गये , और मैं टोकरी से इस प्रसिद दुकान तक पहुंच गया। आज आप महीना पचास हज़ार रुपये कमाते है, और मै दो लाख रुपये महीना कमाता हूँ । लेकिन आप भी जानते है और मे भी जानता हूँ कि हम दोनों अपना अपना काम अपने बच्चों के लिए कर रहे है।
जरा सोचिए सर, मैने तो बहुत कम कमाई पर धंधा शुरू किया लेकिन मेरे बाद मेरे बेटे को यह सब नही झेलना पडेगा । जो संघर्ष मैंने किया हैं वो उसको नहीं करना पड़ेगा। मेरी दुकान मेरे बेटे को मिलेगी। मैने जिंदगी में जो मेहनत की है,  उसका लाभ मेरे बच्चे उठाएंगे। जबकि आपकी जिंदगी भर की मेहनत का लाभ आपके मालिक के बच्चे उठाएंगे। क्योंकि अब आप अपने बेटे सीधे अपनी पोस्ट पर तो नही बिठा सकते हो ना। उसे भी आपकी ही तरह जीरो से शुरूआत करनी पडेगी ।और अपने कार्यकाल के अंत मे वही पहुच जाएगा , जहा अभी आप हो। जबकी मेरा बेटा बिजनेस को यहा से और आगे ले जाएगा , और अपने कार्यकाल में वह हम सबसे बहुत आगे निकल जाएगा। अब आप ही बताइये कि किसका समय और टैलेंट बर्बाद हो रहा है ?” मैनेजर साहब ने समोसेवाले को 2 समोसे के 30 रुपये दिये और बिना कुछ बोले वहा से खिसक लिए।
कार्य आप जो करते हैं वह महत्व नहीं करता बल्कि वह अधिक महत्व करता हैं की आप उस कार्य को कितना मन लगाकर कर रहे हैं इसलिए सदैव याद रखें , जो कर्म करने से आपको अंदर से ख़ुशी और आनंद महसूस हो वही कर्म आपके लिए उचित हैं। उसी में आप सफलता के आयामों को छू सकते हो। 

2 अक्टूबर 2016

दोस्ती सात हज़ार किलोमीटर की।

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कुछ अहसान फरामोश लोगों को यदि छोड़ दें तो जिंदगी मे एक बार  यदि आपकी कोई जान बचा ले, तो कुछ लोग उसका अहसान जिंदगी भर नही भुला पाते है। ऐसी सोच इंसानो मे ही नहीँ, जानवरो मे भी होती है। आपको यकीन आये चाहे न आये, लेकिन एक पेंग्विन ऐसी है जो अपने दोस्त, जिसने उसकी एक बार जान बचाई थी, से मिलने साल मे एक बार साड़े सात हज़ार किलोमीटर का सफर करके जाती है, जिसने 2011 मे उसकी जान बचाई थी।  

हुआ ये था कि आज से पांच वर्ष पहले ब्राज़ील के एक मछुवारे जोया पेरिरा को यह पेंग्विन समुन्द्र के किनारे पड़ी दिखी, गौर से देखने पर जोया ने पाया कि यह अभी मरी नही है, कुछ जान बाकी है। पेंग्विन के  बहुत कमजोर होने पर उन्होंने अपने अनुभव से उसकी देखभाल की, और उसको बचा लिया। तब से यह पेंग्विन जोया का अहसान नही भूली हैI  इन्सान और जानवर के बीच यह दोस्ती  आपसी प्यार और व्यवहार की एक मिसाल है। जिसने भी इस किस्से को सूना है उसने दांतो तले ऊँगली दबाई है। जब भी यह पेंग्विन अपने दोस्त जोया से मिलने आती है, जोया बताते है कि उनको पहले ही पता चल जाता है और वो भी उससे मिलने चले आते है।

1 अक्टूबर 2016

आदिशक्ति माँ दुर्गा

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दुर्गा जी हिन्दू धर्म की देवी हैं। इन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इनके नौ अन्य रूप है जिनकी पूजा नवरात्रों में की जाती है। माना जाता है कि राक्षसों का संहार करने के लिए देवी पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया था। दुर्गा जी को तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले साधक आदि शक्ति और परमदेवी मानते हैं. हिन्दू धर्मानुसार असुरों के अत्याचार से दुखी होकर देवताओं ने जगज्जननी देवी पार्वती का आवाहन किया। देवताओं की पुकार पर देवी प्रकट हुईं तथा उन्हें दैत्यों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की बात कही। तब अपने भक्तों की रक्षा के लिए दुर्गा का रूप धारण किया और राक्षसों का अंत कर दिया। तब से ही दुर्गा को युद्ध की देवी के रूप में जाना जाने लगा। साथ ही कहा जाता है कि दुर्गेश नामक राक्षस का वध करने के कारण ही मां का नाम दुर्गा पड़ा।
 दुर्गा जी, देवी पार्वती का ही रूप है इसलिए इनका भी निवास स्थान कैलाश है। इनका वाहन शेर है। इनके आठ हाथ हैं। इनके एक तरफ के तीन हाथों में तलवार, चक्र और गदा है तथा दूसरी तरफ के तीन हाथों में कमल त्रिशूल और धनुष है। इनके अन्य एक हाथ में शंख और एक हाथ वर मुद्रा में हैं।नवरात्र के पावन पर्व पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के समय श्रद्धालु देवी की विशेष पूजा अर्चना करते है तथा नौ दिनों तक उपवास रखते हैं।

दुर्गा जी से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें 
  1. दुर्गा जी के आठ हाथ हैं।
  2. दुर्गा जी का अस्त्र-शस्त्र गदा, त्रिशूल, धनुष, तलवार, चक्र, गदा, शंख हैं।
  3. माना जाता है कि दुर्गा चालीसा पढ़ने से सभी शत्रुओं का नाश हो जाता है तथा घर में सुख शांति रहती है।
  4. नवरात्रों में मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
  5. दुर्गा जी को नारी शक्ति का परिचायक माना जाता है। दुर्गा जी को एक सशक्त महिला का आदर्श माना जाता है।
देवी दुर्गा के 108 नाम

1. सती  : अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली
2. साध्वी : आशावादी
3. भवप्रीता : भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली
4. भवानी : ब्रह्मांड की निवास
5. भवमोचनी :  संसार बंधनों से मुक्त करने वाली
6. आर्या : देवी
7. दुर्गा :  अपराजेय
8. जया : विजयी
9. आद्य : शुरूआत की वास्तविकता
10. त्रिनेत्र : तीन आँखों वाली
11. शूलधारिणी : शूल धारण करने वाली
12. पिनाकधारिणी : शिव का त्रिशूल धारण करने वाली
13. चित्रा : सुरम्य, सुंदर 
14. चण्डघण्टा : प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली 
15. महातपा : भारी तपस्या करने वाली
16. मन  : मनन- शक्ति
17. बुद्धि : सर्वज्ञाता
18. अहंकारा : अभिमान करने वाली
19. चित्तरूपा : वह जो सोच की अवस्था में है
20. चिता :  मृत्युशय्या
21. चिति : चेतना
22. सर्वमन्त्रमयी : सभी मंत्रों का ज्ञान रखने वाली
23. सत्ता : सत्-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है
24. सत्यानन्दस्वरूपिणी : अनन्त आनंद का रूप
25. अनन्ता :  जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं
26. भाविनी :  सबको उत्पन्न करने वाली, खूबसूरत औरत
27. भाव्या :  भावना एवं ध्यान करने योग्य
28. भव्या :  कल्याणरूपा, भव्यता के साथ
29. अभव्या  : जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं
30. सदागति :  हमेशा गति में, मोक्ष दान
31. शाम्भवी :  शिवप्रिया, शंभू की पत्नी
32. देवमाता : देवगण की माता
33. चिन्ता : चिन्ता
34. रत्नप्रिया : गहने से प्यार
35. सर्वविद्या : ज्ञान का निवास
36. दक्षकन्या : दक्ष की बेटी
37. दक्षयज्ञविनाशिनी : दक्ष के यज्ञ को रोकने वाली
38. अपर्णा : तपस्या के समय पत्ते को भी न खाने वाली
39. अनेकवर्णा : अनेक रंगों वाली
40. पाटला : लाल रंग वाली
41. पाटलावती : गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली
42. पट्टाम्बरपरीधाना : रेशमी वस्त्र पहनने वाली
43. कलामंजीरारंजिनी : पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली
44. अमेय : जिसकी कोई सीमा नहीं
45. विक्रमा : असीम पराक्रमी
46. क्रूरा : दैत्यों के प्रति कठोर
47. सुन्दरी : सुंदर रूप वाली
48. सुरसुन्दरी : अत्यंत सुंदर
49. वनदुर्गा : जंगलों की देवी
50. मातंगी : मतंगा की देवी
51. मातंगमुनिपूजिता : बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय
52. ब्राह्मी : भगवान ब्रह्मा की शक्ति
53. माहेश्वरी : प्रभु शिव की शक्ति
54. इंद्री : इन्द्र की शक्ति
55. कौमारी : किशोरी
56. वैष्णवी : अजेय
57. चामुण्डा : चंड और मुंड का नाश करने वाली
58. वाराही : वराह पर सवार होने वाली
59. लक्ष्मी : सौभाग्य की देवी
60. पुरुषाकृति : वह जो पुरुष धारण कर ले
61. विमिलौत्त्कार्शिनी : आनन्द प्रदान करने वाली
62. ज्ञाना : ज्ञान से भरी हुई
63. क्रिया : हर कार्य में होने वाली
64. नित्या : अनन्त
65. बुद्धिदा : ज्ञान देने वाली
66. बहुला : विभिन्न रूपों वाली
67. बहुलप्रेमा : सर्व प्रिय
68. सर्ववाहनवाहना : सभी वाहन पर विराजमान होने वाली
69. निशुम्भशुम्भहननी : शुम्भ, निशुम्भ का वध करने वाली
70. महिषासुरमर्दिनि : महिषासुर का वध करने वाली
71. मधुकैटभहंत्री : मधु व कैटभ का नाश करने वाली
72. चण्डमुण्ड विनाशिनि : चंड और मुंड का नाश करने वाली
73. सर्वासुरविनाशा : सभी राक्षसों का नाश करने वाली
74. सर्वदानवघातिनी : संहार के लिए शक्ति रखने वाली
75. सर्वशास्त्रमयी : सभी सिद्धांतों में निपुण
76. सत्या : सच्चाई
77. सर्वास्त्रधारिणी : सभी हथियारों धारण करने वाली
78. अनेकशस्त्रहस्ता : हाथों में कई हथियार धारण करने वाली
79. अनेकास्त्रधारिणी : अनेक हथियारों को धारण करने वाली
80. कुमारी : सुंदर किशोरी
81. एककन्या : कन्या
82. कैशोरी : जवान लड़की
83. युवती : नारी
84. यति : तपस्वी
85. अप्रौढा : जो कभी पुराना ना हो
86. प्रौढा : जो पुराना है
87. वृद्धमाता : शिथिल
88. बलप्रदा : शक्ति देने वाली
89. महोदरी : ब्रह्मांड को संभालने वाली
90. मुक्तकेशी : खुले बाल वाली
91. घोररूपा : एक भयंकर दृष्टिकोण वाली
92. महाबला : अपार शक्ति वाली
93. अग्निज्वाला : मार्मिक आग की तरह
94. रौद्रमुखी : विध्वंसक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा
95. कालरात्रि : काले रंग वाली
96. तपस्विनी : तपस्या में लगे हुए
97. नारायणी : भगवान नारायण की विनाशकारी रूप
98. भद्रकाली :  काली का भयंकर रूप
99. विष्णुमाया : भगवान विष्णु का जादू
100. जलोदरी : ब्रह्मांड में निवास करने वाली
101. शिवदूती : भगवान शिव की राजदूत
102. करली   : हिंसक
103. अनन्ता : विनाश रहित
104. परमेश्वरी : प्रथम देवी
105. कात्यायनी : ऋषि कात्यायन द्वारा पूजनीय
106. सावित्री : सूर्य की बेटी
107. प्रत्यक्षा : वास्तविक
108. ब्रह्मवादिनी : वर्तमान में हर जगह वास करने वाली
दुर्गा जी के प्रसिद्ध मंदिर 
मां वैष्णोदेवी
मनसा देवी
नयना देवी
मैहर देवी
मां चामुंडा देवी
कालिका माता
ज्वाला जी
देवास माता टेकरी